यजुर्वेद (अध्याय 40)
कु॒र्वन्ने॒वेह कर्मा॑णि जिजीवि॒षेच्छ॒तꣳ समाः॑।ए॒वं त्वयि॒ नान्यथे॒तोऽस्ति॒ न कर्म॑ लिप्यते॒ नरे॑ ॥ (२)
हे ईश्वर! हम कर्म करते हुए सौ वर्ष तक जीने की इच्छा करें. इस के अलावा कल्याण का कोई अन्य मार्ग नहीं है. कर्म मनुष्य को लिप्त नहीं करते. (२)
O God! Let us want to live for a hundred years while doing karma. Apart from this, there is no other path to welfare. Deeds do not involve human beings. (2)