हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 40.5

अध्याय 40 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
तदे॑जति॒ तन्नैज॑ति॒ तद् दू॒रे तद्व॑न्ति॒के।तद॒न्तर॑स्य॒ सर्व॑स्य॒ तदु॒ सर्व॑स्यास्य बाह्य॒तः ॥ (५)
"बह (परम तत्त्व) गतिशील है और स्थिर भी है. बह दूर भी है और निकट भी है बह जड़ और चेतन दोनों के भीतर भी है और बाहर भी है. (५)