हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 40.4

अध्याय 40 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
अने॑ज॒देकं॒ मन॑सो॒ जवी॑यो॒ नैन॑द्दे॒वाऽआ॑प्नुव॒न् पूर्व॒मर्ष॑त्।तद्धाव॑तो॒ऽन्यानत्ये॑ति॒ तिष्ठ॒त्तस्मि॑न्न॒पो मा॑त॒रिश्वा॑ दधाति ॥ (४)
अजन्मा ईश्वर एक है. वह मन से भी ज्यादा गतिवान और फुरतीला है. देवगण भी इसे प्राप्त नहीं कर पाते हैं. स्थिर रह कर भी वह दौड़ता हुआ गतिशीलों को पछाड़ देता है. वह जल में रहता है. वायु को धारण करता है. (४)
The unborn God is one. She is more dynamic and agile than the mind. Devgans are also not able to achieve this. Even when it is still, it beats the moving dynamics. He lives in water. It holds air. (4)