यजुर्वेद (अध्याय 40)
यस्मि॒न्त्सर्वा॑णि भू॒तान्या॒त्मैवाभू॑द्विजान॒तः।तत्र॒ को मोहः॒ कः शोक॑ऽएकत्वम॑नु॒पश्य॑तः ॥ (७)
जिस (स्थिति) में मनुष्य यह जान लेता है कि सभी भूतों में एक ही आत्मतत्त्व है, तब क्या मोह? क्या शोक ? उसे सर्वत्र एक जैसी स्थिति दिखाई देती है. (७)
What is the attachment when man knows that all beings have the same self-essence? What sorrow? He sees the same situation everywhere. (7)