यजुर्वेद (अध्याय 6)
ऐ॒न्द्रः प्रा॒णोऽअङ्गे॑ऽअङ्गे॒ निदी॑ध्यदै॒न्द्रऽउ॑दा॒नोऽअङ्गे॑ऽअङ्गे॒ निधी॑तः। देव॑ त्वष्ट॒र्भूरि॑ ते॒ सꣳस॑मेतु॒ सल॑क्ष्मा॒ यद्विषु॑रूपं॒ भवा॑ति। दे॒व॒त्रा यन्त॒म॑वसे॒ सखा॒योऽनु॑ त्वा मा॒ता पि॒तरो॑ मदन्तु ॥ (२०)
अंगअंग, प्राणप्राण व उदान में इंद्र विराजमान हैं. त्वष्टा इन सब की सुरक्षा करने की कृपा करों. इंद्र की शक्ति इन सब की सुरक्षा करने की कृपा करे. देव की शक्ति इन सब की रक्षा करने की कृपा करें. देव हमारे सखाओं का कल्याण करने की कृपा करें. देव हमारे मातापिता को आनंदित करने की कृपा करें. (२०)
Indra is seated in Angaang, Pranapran b Udan. Please protect all this. May Indra's power to protect all of them. Please may the power of God protect all of them. May God be pleased to do good to our friends. May God bless our parents with joy. (20)