हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 6.33

अध्याय 6 → मंत्र 33 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
यत्ते॑ सोम दि॒वि ज्योति॒र्यत्पृ॑थि॒व्यां यदु॒राव॒न्तरि॑क्षे। तेना॒स्मै यज॑मानायो॒रु रा॒ये कृ॒ध्यधि॑ दा॒त्रे वो॑चः ॥ (३३)
हे सोम! आप स्वर्गलोक व अंतरिक्षलोक तक फेले हुए हैं. आप दिव्य व प्रकाशमान हैं. आप यजमान के लिए धन धारिए, धन दीजिए, आप यजमान की सहायता कीजिए. (३३)
O Mon! You have fallen to heaven and space. You are divinely illuminated. You hold money for the host, give money, you help the host. (33)