यजुर्वेद (अध्याय 6)
श्वा॒त्रा स्थ॑ वृत्र॒तुरो॒ राधो॑गूर्त्ताऽअ॒मृत॑स्य॒ पत्नीः॑। ता दे॑वीर्देव॒त्रेमं य॒ज्ञं न॑य॒तोप॑हूताः॒ सोम॑स्य पिबत ॥ (३४)
देवियां (सोम रूपी) अमृत की पली हैं वे कल्याणकारी वृत्र नाशक व धनदायक हैं. आप इस यज्ञ की रक्षा करें. आप इस यज्ञ का मार्ग निर्देशन करें. आप इस यज्ञ में सोमरस का पान करने की कृपा करें. (३४)
The goddesses (Soma's form) are the children of nectar, they are welfare vritra destroyers and wealthy. You protect this yajna. You guide this yajna. Please drink someras in this yajna. (34)