यजुर्वेद (अध्याय 8)
देवी॑रापऽए॒ष वो॒ गर्भ॒स्तꣳ सुप्री॑त॒ꣳ सुभृ॑तं बिभृत। देव॑ सोमै॒ष ते॑ लो॒कस्तस्मि॒ञ्छञ्च॒ वक्ष्व॒ परि॑ च वक्ष्व ॥ (२६)
हे दिव्य जल! यह सोमपात्र आप का गर्भ है. आप प्रेम से व इस का पोषण करते हुए ग्रहण करें. हे सोम! जल आप का लोक है. आप उस की इच्छा करिए. आप भी सुखी रहिए. हमें भी सुखी रखिए. संरक्षण दीजिए. (२६)
O divine water! This sompatra is your womb. You should take it with love and nourish it. O Mon! Water is your folk. You wish him. You also be happy. Keep us happy too. Give protection. (26)