हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 10.4.15

कांड 10 → सूक्त 4 → मंत्र 15 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 10)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
आयम॑ग॒न्युवा॑ भि॒षक्पृ॑श्नि॒हाप॑राजितः । स वै स्व॒जस्य॒ जम्भ॑न उ॒भयो॒र्वृश्चि॑कस्य च ॥ (१५)
कभी पराजित न होने वाला युवा वैद्य मंत्र शक्ति से संपन्न है. यह स्वज नामक सर्प और बिच्छू का विनाश कर सकता है. (१५)
The young vaidya mantra that is never defeated is endowed with power. It can destroy snakes and scorpions called swaj. (15)