अथर्ववेद (कांड 10)
यत्र॒ ऋष॑यः प्रथम॒जा ऋचः॒ साम॒ यजु॑र्म॒ही । ए॑क॒र्षिर्यस्मि॒न्नार्पि॑तः स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः ॥ (१४)
पूर्ववर्ती ऋषि, ऋचाएं, साममंत्र, यजुर्वेद के मंत्र तथा महती ब्रह्मविद्या जिस में स्थित है एवं एक ऋषि जिस में समाया हुआ है, उस परमात्मा के विषय में बताओ कि वह कौन है? (१४)
Tell us about the previous sage, riches, sammantra, yajurveda mantras and mahati brahmavidya in which a sage is situated and in which a sage is immersed, who is he? (14)