अथर्ववेद (कांड 10)
असच्छा॒खां प्र॒तिष्ठ॑न्तीं पर॒ममि॑व॒ जना॑ विदुः । उ॒तो सन्म॑न्य॒न्तेऽव॑रे॒ ये ते॒ शाखा॑मु॒पास॑ते ॥ (२१)
असत् अर्थात् निराकार से उत्पन्न हुई शाखा स्थित है. मनुष्य उसी को सब से श्रेष्ठ तत्त्व मानते हैं तथा उस शाखा की उपासना करते हैं. (२१)
The branch originating from the formless is located. Human beings consider him to be the best element and worship that branch. (21)