हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 10.8.31

कांड 10 → सूक्त 8 → मंत्र 31 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 10)

अथर्ववेद: | सूक्त: 8
अवि॒र्वै नाम॑ दे॒वत॒र्तेना॑स्ते॒ परी॑वृता । तस्या॑ रू॒पेणे॒मे वृ॒क्षा हरि॑ता॒ हरि॑तस्रजः ॥ (३१)
वही रक्षा करने वाली दिव्य शक्ति है और सत्य से घिरी हुई है. उसी के रूप से वे सारे वृक्ष हरेभरे हैं और हरे पत्तों से ढके रहते हैं. (३१)
She is the protecting divine power and surrounded by truth. In the same way, all those trees are green and covered with green leaves. (31)