अथर्ववेद (कांड 10)
अन्ति॒ सन्तं॒ न ज॑हा॒त्यन्ति॒ सन्तं॒ न प॑श्यति । दे॒वस्य॑ पश्य॒ काव्यं॒ न म॑मार॒ न जी॑र्यति ॥ (३२)
समीप से आए हुए को वह छोड़ा नहीं है तथा समीप होने पर भी वह दिखाई नहीं देता है. उस देव अर्थात् परमात्मा का काव्य देखो जो कभी न मरता है और न वृद्ध होता है. (३२)
He has not left the person who came from nearby and he is not visible even when he is close. Look at the poetry of that God, that is, God, who never dies or grows old. (32)