हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 11.10.25

कांड 11 → सूक्त 10 → मंत्र 25 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 11)

अथर्ववेद: | सूक्त: 10
आ॑ला॒पाश्च॑ प्रला॒पाश्चा॑भीलाप॒लप॑श्च॒ ये । शरी॑रं॒ सर्वे॒ प्रावि॑शन्ना॒युजः॑ प्र॒युजो॒ युजः॑ ॥ (२५)
सार्थक वचन, निरर्थक वचन, अभिलाषाओं से पूर्ण वचन, आयोजन, प्रयोजन और योजना-इन सब ने मनुष्य के शरीर में प्रवेश किया. (२५)
Meaningful words, meaningless words, words full of desires, organizing, purpose, and planning—all these entered the human body. (25)