हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 11.10.27

कांड 11 → सूक्त 10 → मंत्र 27 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 11)

अथर्ववेद: | सूक्त: 10
आ॒शिष॑श्च प्र॒शिष॑श्च सं॒शिषो॑ वि॒शिष॑श्च॒ याः । चि॒त्तानि॒ सर्वे॑ संक॒ल्पाः शरी॑र॒मनु॒ प्रावि॑शन् ॥ (२७)
मनचाहे फल की प्रार्थनाएं, उत्कृष्ट प्रार्थनाएं, भलीभांति होने वाली प्रार्थनाएं तथा अनेक प्रकार की प्रार्थनाएं, मनबुद्धि और अहंकार, सभी संकल्प-इन्होंने पुरुष शरीर में प्रवेश किया. (२७)
Prayers of desired fruit, excellent prayers, well-being prayers and many types of prayers, mind and ego, all resolutions - they entered the male body. (27)