अथर्ववेद (कांड 11)
आस्ते॑यीश्च॒ वास्ते॑यीश्च त्वर॒णाः कृ॑प॒णाश्च॒ याः । गुह्याः॑ शु॒क्रा स्थू॒ला अ॒पस्ता बी॑भ॒त्साव॑सादयन् ॥ (२८)
भलीभांति स्नान, स्नान से संबंधित जल, शीघ्रता से चलने वाले तथा थोड़ी मात्रा में होने वाले जल, गुफा में होने वाले, श्वेत वर्ण के अर्थात् स्वच्छ जल, अधिक मात्रा में होने वाले नदी रूप में वर्तमान जल-इन सब ने पुरुष के शरीर में प्रवेश किया. (२८)
Good bathing, bathing water, fast-moving and small amounts of water, cave-in, white-colored, high-level river water, present water in the form of a river – all of these entered the man's body. (28)