हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 11.11.12

कांड 11 → सूक्त 11 → मंत्र 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 11)

अथर्ववेद: | सूक्त: 11
उद्वे॑पय॒ सं वि॑जन्तां भिया॒मित्रा॒न्त्सं सृ॑ज । उ॑रुग्रा॒हैर्बा॑ह्व॒ङ्कैर्विध्या॑मित्रान्न्यर्बुदे ॥ (१२)
हे न्यर्बुदि नाम के सर्प! तुम हमारे शत्रुओं को कंपित करो. तुम्हारे भय के कारण वे अपने स्थान से भाग जाएं. इस के बाद तुम हमारे शत्रुओं के पैरों और हाथों को बांध कर मारो. (१२)
O serpent named Nyarbudi! You stagger our enemies. They may run away from their place because of your fear. After this, you tie the feet and hands of our enemies and kill them. (12)