हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 11.11.15

कांड 11 → सूक्त 11 → मंत्र 15 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 11)

अथर्ववेद: | सूक्त: 11
श्वन्वतीरप्स॒रसो॑ रूपका उ॒तार्बु॑दे । अ॑न्तःपा॒त्रे रेरि॑हतीं रि॒शां दु॑र्णिहितै॒षिणी॑म् । सर्वा॒स्ता अ॑र्बुदे॒ त्वम॒मित्रे॑भ्यो दृ॒शे कु॑रूदा॒रांश्च॒ प्र द॑र्शय ॥ (१५)
हे अर्बुदि! तुम हमारे शत्रुओं की माया के द्वारा निर्मित ऐसी अप्सराओं को दिखाओ, जिन के साथ शिकारी कुत्ते हों. तुम उन्हें ऐसी गायों को दिखाओ जो पात्र को बारबार चाट रही हों. तुम उन्हें उल्कापात आदि अदभुत अपशकुन दिखाओ. (१५)
O Arbudi! Show us such nymphs created by the Maya of our enemies, with whom there are hunting dogs. You show them cows that are licking the vessel again and again. You show them amazing omens like meteor etc. (15)