अथर्ववेद (कांड 11)
ख॒डूरे॑ऽधिचङ्क्र॒मां खर्वि॑कां खर्ववा॒सिनी॑म् । य उ॑दा॒रा अ॒न्तर्हि॑ता गन्धर्वाप्स॒रस॑श्च॒ ये स॒र्पा इ॑तरज॒ना रक्षां॑सि ॥ (१६)
हे अर्बुदि नाम के सर्प! तुम हमारे शत्रुओं को माया के द्वारा निर्मित ऐसे छोटे प्राणियों को दिखाओ. जो आकाश में चलफिर रहे हौँ और धीमी आवाज कर रहे हों. (१६)
O serpent named Arbudi! Show our enemies such little creatures created by Maya. Those who are walking in the sky and making a low sound. (16)