हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 11.11.26

कांड 11 → सूक्त 11 → मंत्र 26 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 11)

अथर्ववेद: | सूक्त: 11
तेषां॒ सर्वे॑षा॒मीशा॑ना॒ उत्ति॑ष्ठत॒ सं न॑ह्यध्वं॒ मित्रा॒ देव॑जना यू॒यम् । इ॒मं सं॑ग्रा॒मं सं॒जित्य॑ यथालो॒कं वि ति॑ष्ठध्वम् ॥ (२६)
हमारे मित्र देवगण उन सभी शत्रुओं के शिक्षक होते हुए उठें. ये सभी उन की शिक्षा के लिए तैयार हो जाएं. हे शत्रुओ! देवगण इस संग्राम को जीत कर शत्रुओं का विनाश कर के अपने स्थान को जाएं. (२६)
Our friend Devgan should rise up as a teacher of all those enemies. All of them should be ready for their education. O enemies! Devgan won this battle and destroyed the enemies and went to his place. (26)