अथर्ववेद (कांड 11)
तं त्वौ॑द॒नस्य॑ पृच्छामि॒ यो अ॑स्य महि॒मा म॒हान् ॥ (२२)
शिष्य ने प्रश्न किया-'हे गुरु! मैं आप के इस ओदन की उस महिमा को पूछता हूं, जो अत्यधिक है.' (२२)
The disciple asked, "O Master! I ask the glory of this odan of yours, which is excessive. (22)