अथर्ववेद (कांड 11)
यथा॑ प्राण बलि॒हृत॒स्तुभ्यं॒ सर्वाः॑ प्र॒जा इ॒माः । ए॒वा तस्मै॑ ब॒लिं ह॑रा॒न्यस्त्वा॑ शृ॒णव॑त्सुश्रवः ॥ (१९)
हे प्राण! जिस प्रकार ये सभी प्रजाएं तुम्हारे लिए बलि प्रस्तुत करें. हे सुनने वाले प्राण! जो तुम्हारा माहात्म्य सुनता है, उस के लिए भी सब बलि प्रस्तुत कर देते हैं. (१९)
O soul! Just as all these people offer sacrifices for you. O listening soul! Everyone presents sacrifices for the one who hears your greatness. (19)