हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 11.8.12

कांड 11 → सूक्त 8 → मंत्र 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 11)

अथर्ववेद: | सूक्त: 8
ये दे॒वा दि॑वि॒षदो॑ अन्तरिक्ष॒सद॑श्च॒ ये । पृ॑थि॒व्यां श॒क्रा ये श्रि॒तास्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः ॥ (१२)
जो देव स्वर्ग में निवास करते हैं और अंतरिक्ष अर्थात्‌ धरती और आकाश के मध्य निवास करते हैं, जो देव पृथ्वी पर आश्रित हैं, वे हमें पाप से मुक्त करें. (१२)
May the gods who reside in heaven and live between space i.e. earth and sky, those who are dependent on earth, may they free us from sin. (12)