हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 11.9.26

कांड 11 → सूक्त 9 → मंत्र 26 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 11)

अथर्ववेद: | सूक्त: 9
आ॑न॒न्दा मोदाः॑ प्र॒मुदो॑ऽभिमोद॒मुद॑श्च॒ ये । उच्छि॑ष्टाज्जज्ञिरे॒ सर्वे॑ दि॒वि दे॒वा दि॑वि॒श्रितः॑ ॥ (२६)
विषयों के उपभोग से उत्पन्न आनंद नाम के विशेष सुख, हर्ष, अधिक प्रसन्नता एवं इन्हें देने वाले पदार्थ, स्वर्ग और स्वर्ग में स्थित देव-ये सभी यज्ञशेष रूपी ब्रह्म से उत्पन्न हुए. (२६)
The special pleasures, joys, greater happiness and substances that give them, the gods in heaven and heaven , all of which originated from Brahman in the form of sacrifices. (26)