हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 11.9.27

कांड 11 → सूक्त 9 → मंत्र 27 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 11)

अथर्ववेद: | सूक्त: 9
दे॒वाः पि॒तरो॑ मनु॒ष्या गन्धर्वाप्स॒रस॑श्च॒ ये । उच्छि॑ष्टाज्जज्ञिरे॒ सर्वे॑ दि॒वि दे॒वा दि॑वि॒श्रितः॑ ॥ (२७)
देव, पितर, मनुष्य, गंधर्व, अप्सराएं, स्वर्ग और स्वर्ग में स्थित देव-ये सभी यज्ञ शेष रूपी ब्रह्म से उत्पन्न हुए. (२७)
Dev, Pitar, Man, Gandharva, Apsaras, Gods located in heaven and heaven - all these sacrifices originated from Brahman in the form of the rest. (27)