अथर्ववेद (कांड 12)
उ॒दीरा॑णा उ॒तासी॑ना॒स्तिष्ठ॑न्तः प्र॒क्राम॑न्तः । प॒द्भ्यां द॑क्षिणस॒व्याभ्यां॒ मा व्य॑थिष्महि॒ भूम्या॑म् ॥ (२८)
हम अपने दाएं अथवा बाएं पैर से चलते हुए, बैठते अथवा खड़े होते हुए कभी व्यथित न हों. (२८)
We should never be disturbed while walking, sitting or standing with our right or left foot. (28)