हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 12.1.62

कांड 12 → सूक्त 1 → मंत्र 62 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 12)

अथर्ववेद: | सूक्त: 1
उ॑प॒स्थास्ते॑ अनमी॒वा अ॑य॒क्ष्मा अ॒स्मभ्यं॑ सन्तु पृथिवि॒ प्रसू॑ताः । दी॒र्घं न॒ आयुः॑ प्रति॒बुध्य॑माना व॒यं तुभ्यं॑ बलि॒हृतः॑ स्याम ॥ (६२)
हे पृथ्वी! तुम में रहने वाले हमारे लोग यक्ष्मा रोग रहित रहें. हम अपनी दीर्घ आयु से युक्त हो कर तुम्हें हवि देने वाले बनें. (६२)
O earth! May our people living in you be free from tuberculosis. Let us be equipped with our long life and give you strength. (62)