अथर्ववेद (कांड 12)
क्षि॒प्रं वै तस्या॒दह॑नं॒ परि॑ नृत्यन्ति के॒शिनी॑राघ्ना॒नाः पा॒णिनोर॑सि कुर्वा॒णाः पा॒पमै॑ल॒बम् ॥ (२)
जो क्षत्रिय ब्राह्मण की गाय ले जाता है, उस की चिता भस्म के समीप केशों वाली स्त्रियां अपनी छाती कूटती हैं और आंसू बहाती हैं. (२)
The kshatriya who takes the brahmin's cow, near his pyre bhasma, the women with hair crush their chests and shed tears. (2)