हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 12.2.15

कांड 12 → सूक्त 2 → मंत्र 15 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 12)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
यो नो॒ अश्वे॑षु वी॒रेषु॒ यो नो॒ गोष्व॑जा॒विषु॑ । क्र॒व्यादं॒ निर्णु॑दामसि॒ यो अ॒ग्निर्ज॑न॒योप॑नः ॥ (१५)
जो क्रव्याद हमारे अश्चों, गायों, बकरियों तथा वीरपुत्र, पौत्रादि में प्रविष्ट हुआ है, उसे हम दूर भगाते हैं. (१५)
We drive away the kravyada that has entered our horses, cows, goats and veerputra, grandson. (15)