अथर्ववेद (कांड 12)
उत्ति॑ष्ठता॒ प्र त॑रता सखा॒योऽश्म॑न्वती न॒दी स्य॑न्दत इ॒यम् । अत्रा॑ जहीत॒ ये अस॒न्नशि॑वाः शि॒वान्त्स्यो॒नानुत्त॑रेमा॒भि वाजा॑न् ॥ (२७)
हे मित्रो! हे मित्रो! उठो और तैरना आरंभ करो. पत्थरों वाली सरिता तेजी से बह रही है. जो अकल्याणकारी हैं. उन्हें हम यहीं पर त्याग दें. हम नदी को पार करके सुख देने वाले अन्नों की प्राप्ति करें. (२७)
O friends! O friends! Get up and start swimming. Sarita with stones is flowing fast. Which are unhelpful. Let us leave them here. Let us cross the river and get the food that gives happiness. (27)