हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 12.2.28

कांड 12 → सूक्त 2 → मंत्र 28 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 12)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
वै॑श्वदे॒वीं वर्च॑सा॒ आ र॑भध्वं शु॒द्धा भव॑न्तः॒ शुच॑यः पाव॒काः । अ॑ति॒क्राम॑न्तो दुरि॒ता प॒दानि॑ श॒तं हिमाः॒ सर्व॑वीरा मदेम ॥ (२८)
हे पवित्र देवों वाली अग्नियो! तुम शुद्ध होने के समय सब देवताओं का स्तवन करो. ऋग्वेद के पदों से पापों को लांघते हुए हम सौ हेमंतों तक पुत्रादि सहित आनंदित रहें. (२८)
O agnis of holy gods! Praise all the gods when you are cleansed. Crossing the sins from the verses of rigveda, we should be happy with the son for a hundred hemantas. (28)