हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 12.2.40

कांड 12 → सूक्त 2 → मंत्र 40 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 12)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
यद्रि॒प्रं शम॑लं चकृ॒म यच्च॑ दुष्कृ॒तम् । आपो॑ मा॒ तस्मा॑च्छुम्भन्त्व॒ग्नेः संक॑सुकाच्च॒ यत् ॥ (४०)
हम जो पाप कर चुके हैं, उस पाप से तथा शव भक्षक अग्नि के स्पर्श के दोष से मुझे जल बचाएं. (४०)
Save me water from the sin we have committed and the guilt of touching the corpse-eater agni. (40)