हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 12.2.48

कांड 12 → सूक्त 2 → मंत्र 48 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 12)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
अ॑न॒ड्वाहं॑ प्ल॒वम॒न्वार॑भध्वं॒ स वो॒ निर्व॑क्षद्दुरि॒ताद॑व॒द्यात् । आ रो॑हत सवि॒तुर्नाव॑मे॒तां ष॒ड्भिरु॒र्वीभि॒रम॑तिं तरेम ॥ (४८)
हवि रूप माता की वाहक अग्नि का स्तवन करो. वे पाप से तुम्हारी रक्षा करें. अग्नि सविता की नौका पर चढ़ कर छह देवियों के द्वारा हमें बुद्धि से बचाएंगे. (४८)
Praise the agni of the mother in the form of Havi. May they protect you from sin. Agni will climb on Savita's boat and save us from wisdom through six goddesses. (48)