हरि ॐ
अथर्ववेद (Atharvaved)
अथर्ववेद (कांड 12)
सैषा भी॒मा ब्र॑ह्मग॒व्यघवि॑षा सा॒क्षात्कृ॒त्या कूल्ब॑ज॒मावृ॑ता ॥ (१)
ब्राह्मण की यह धेनु विराजमान होती है. कूल्बज पाप से ढके हुए हिंसा करने वाले विष से युक्त हुई यह धेनु कृत्या के समान हो जाती है. (१)
This dhenu of a Brahmin is seated. It becomes like a dhenu krita, covered with sin-covered poison. (1)
अथर्ववेद (कांड 12)
सर्वा॑ण्यस्यां घो॒राणि॒ सर्वे॑ च मृ॒त्यवः॑ ॥ (२)
ब्राह्मण की इस गाय में सभी विकराल कर्म और मृत्यु देने वाले कारण व्याप्त रहते है. (२)
All the terrible deeds and death-giving causes are prevalent in this cow of Brahmin. (2)
अथर्ववेद (कांड 12)
सर्वा॑ण्यस्यां क्रू॒राणि॒ सर्वे॑ पुरुषव॒धाः ॥ (३)
ब्राह्मण की इस गाय में सभी प्रकार के कूट कर्म तथा पुरुषों के सब प्रकार के वध व्याप्त रहते हैं. (३)
In this cow of Brahmin, all kinds of coot deeds and all kinds of slaughter of men are prevalent. (3)
अथर्ववेद (कांड 12)
सा ब्र॑ह्म॒ज्यं दे॑वपी॒युं ब्र॑ह्मग॒व्यादी॒यमा॑ना मृ॒त्योः पड्वी॑ष॒ आ द्य॑ति ॥ (४)
ब्राह्मण से छीनी हुई इस प्रकार की यह गाय ब्राह्मणत्व को अपमानित करने वाले मनुष्य को मृत्यु के बंधन में बांध देती है. (४)
This type of cow snatched from a Brahmin binds a man who humiliates Brahmanism in the bondage of death. (4)
अथर्ववेद (कांड 12)
मे॒निः श॒तव॑धा॒ हि सा ब्र॑ह्म॒ज्यस्य॒ क्षिति॒र्हि सा ॥ (५)
जो मनुष्य ब्राह्मण की आयु क्षीण करता है. उस को क्षीण करने वाली यह गौ सैकड़ों प्रकार के संहारक अस्त्रों के समान बन जाती है. (५)
The person who reduces the life of a Brahmin. This cow that weakens it becomes like hundreds of types of destructive weapons. (5)
अथर्ववेद (कांड 12)
तस्मा॒द्वै ब्रा॑ह्म॒णानां॒ गौर्दु॑रा॒धर्षा॑ विजान॒ता ॥ (६)
इसलिए ब्राह्मण की धेनु को विद्वान् पुरुष सैकड़ों का वध करने वाली के रूप में जाने. (६)
Therefore, the Brahmin's Dhenu is known as the one who killed hundreds of learned men. (6)
अथर्ववेद (कांड 12)
वज्रो॒ धाव॑न्ती वैश्वान॒र उद्वी॑ता ॥ (७)
ब्राह्मण की गाय वज्र के समान दौड़ती है तथा अग्नि के समान ऊपर उठती है. (७)
The Brahmin's cow runs like a thunderbolt and rises like agni. (7)
अथर्ववेद (कांड 12)
हे॒तिः श॒फानु॑त्खि॒दन्ती॑ महादे॒वो॒पेक्ष॑माणा ॥ (८)
खुरों का शब्द करती हुई ब्राह्मण की गाय महादेव के आयुध के रूप में बन जाती है. (८)
The Brahmin's cow becomes as mahadev's armament while making the word of hooves. (8)