हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 12.7.10

कांड 12 → सूक्त 7 → मंत्र 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 12)

अथर्ववेद: | सूक्त: 7
मृ॒त्युर्हि॑ङ्कृण्व॒त्युग्रो दे॒वः पुच्छं॑ प॒र्यस्य॑न्ती ॥ (१०)
हुंकार का शब्द करती हुई ब्राह्मण की गाय मृत्यु के समान होती हैं. सभी ओर पूंछ को घुमाती हुई यह गाय उग्र रूप वाली हो जाती है. (१०)
A Brahmin's cow is like death while uttering a hunkar. Turning the tail all around, this cow becomes furious. (10)