अथर्ववेद (कांड 12)
स॑र्वज्या॒निः कर्णौ॑ वरीव॒र्जय॑न्ती राजय॒क्ष्मो मेह॑न्ती ॥ (११)
सभी प्रकार से आयु को क्षीण करने वाली यह गौ कानों को हिलाती है. यह गौ अपने मूत्र को त्यागती हुई क्षय अर्थात् विनाश को उत्पन्न करने वाली हो जाती है. (११)
This cow, which weakens age in all ways, moves the ears. This cow discards its urine and becomes the cause of decay i.e. destruction. (11)