हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 12.8.11

कांड 12 → सूक्त 8 → मंत्र 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 12)

अथर्ववेद: | सूक्त: 8
अ॑शि॒ता लो॒काच्छि॑नत्ति ब्रह्मग॒वी ब्र॑ह्म॒ज्यम॒स्माच्चा॒मुष्मा॑च्च ॥ (११)
यदि ब्राह्मण को हानि पहुंचाई जाए तो ब्राह्मण की गाय इहलोक और परलोक दोनों को बिगाड़ देती है. (११)
If a Brahmin is harmed, the Brahmin's cow spoils both this world and the hereafter. (11)