हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 12)

अथर्ववेद: | सूक्त: 8
वैरं॑ विकृ॒त्यमा॑ना॒ पौत्रा॑द्यं विभा॒ज्यमा॑ना ॥ (१)
यह ब्राह्मण की अपहृत अर्थात्‌ चुराई हुई गाय है. यह पुत्र, पौत्र आदि का बंटवारा कर उन का विनाश करने वाली है. (१)
This is a Brahmin's abducted cow. It is going to destroy sons, grandsons etc. by dividing them. (1)

अथर्ववेद (कांड 12)

अथर्ववेद: | सूक्त: 8
दे॑वहे॒तिर्ह्रि॒यमा॑णा॒ व्यृद्धिर्हृ॒ता ॥ (२)
ब्राह्मणों की यह गाय हरण करते समय अर्थात्‌ चुराते समय अस्त्र रूप है और चुराने के बाद चुराने वाले को क्षीण करने वाली होती है. (२)
This cow of Brahmins is a weapon while stealing and after stealing, it is going to weaken the stealer. (2)

अथर्ववेद (कांड 12)

अथर्ववेद: | सूक्त: 8
पा॒प्माधि॑धी॒यमा॑ना॒ पारु॑ष्यमवधी॒यमा॑ना ॥ (३)
पाप रूप होने वाली ब्राह्मण की यह गाय कठोरता उत्पन्न करती है. (३)
This cow of a Brahmin, which is a sin form, creates harshness. (3)

अथर्ववेद (कांड 12)

अथर्ववेद: | सूक्त: 8
वि॒षं प्र॒यस्य॑न्ती त॒क्मा प्रय॑स्ता ॥ (४)
ब्राह्मण की चुराई हुई गाय यदि दूध देती है तो इस का दूध और मांस विष के समान होता है तथा यह चुराने वाले का जीवन संकट में डालने का कारण बनती है. (४)
If the stolen cow of a Brahmin gives milk, then its milk and meat are like poison and it causes the life of the stealer to be in danger. (4)

अथर्ववेद (कांड 12)

अथर्ववेद: | सूक्त: 8
अ॒घं प॒च्यमा॑ना दुः॒ष्वप्न्यं॑ प॒क्वा ॥ (५)
ब्राह्मण की यह गाय पकाते समय व्यसनों अर्थात्‌ बुरी लतों को बढ़ाने वाली है तथा पक जाने पर बुरे स्वप्नों का कारण बनती है. (५)
This cow of Brahmin is going to increase addictions i.e. bad addictions while cooking and causes bad dreams when cooked. (5)

अथर्ववेद (कांड 12)

अथर्ववेद: | सूक्त: 8
मू॑ल॒बर्ह॑णी पर्याक्रि॒यमा॑णा॒ क्षितिः॑ प॒र्याकृ॑ता ॥ (६)
ब्राह्मण की चुराई हुई गाय को अगर बेचा जाए तो चुराने वाले को जड़ से उखाड़ देती है. बेचने के बाद यह चुराने वाले को क्षीण करती है. (६)
If the stolen cow of a Brahmin is sold, it uproots the stolen one. After selling, it weakens the stealer. (6)

अथर्ववेद (कांड 12)

अथर्ववेद: | सूक्त: 8
असं॑ज्ञा ग॒न्धेन॒ शुगु॑द्ध्रि॒यमा॑णाशीवि॒ष उद्धृ॑ता ॥ (७)
यदि ब्राह्मण की गाय को उठाया तो उठाते समय यह शोक प्रदान करती है और उठाने के बाद उठाने वाले के लिए सर्प के विष के समान बन जाती है. यह अपनी गंध से चुराने वाले की चेतना नष्ट कर देती है. (७)
If the Brahmin's cow is raised, it provides mourning while lifting it and after lifting it becomes like snake venom for the lifter. It destroys the consciousness of the stealer with its smell. (7)

अथर्ववेद (कांड 12)

अथर्ववेद: | सूक्त: 8
अभू॑तिरुपह्रि॒यमा॑णा॒ परा॑भूति॒रुप॑हृता ॥ (८)
यदि ब्राह्मण की गाय चुरा कर किसी को उपहार में दी जाए तो यह पराभव अर्थात्‌ हार का कारण बनती है. उपहार में देने के बाद यह उपहार देने वाले की समृद्धि नष्ट करती है. (८)
If a Brahmin's cow is stolen and gifted to someone, it causes defeat. After gifting, it destroys the prosperity of the gift giver. (8)
Page 1 of 2Next →