हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 12.8.4

कांड 12 → सूक्त 8 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 12)

अथर्ववेद: | सूक्त: 8
वि॒षं प्र॒यस्य॑न्ती त॒क्मा प्रय॑स्ता ॥ (४)
ब्राह्मण की चुराई हुई गाय यदि दूध देती है तो इस का दूध और मांस विष के समान होता है तथा यह चुराने वाले का जीवन संकट में डालने का कारण बनती है. (४)
If the stolen cow of a Brahmin gives milk, then its milk and meat are like poison and it causes the life of the stealer to be in danger. (4)