हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 14.2.15

कांड 14 → सूक्त 2 → मंत्र 15 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 14)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
प्रति॑ तिष्ठवि॒राड॑सि॒ विष्णु॑रिवे॒ह स॑रस्वति । सिनी॑वालि॒ प्र जा॑यतां॒ भग॑स्यसुम॒ताव॑सत् ॥ (१५)
हे सरस्वती! तू विष्णु के समान विराट्‌ है. इसलिए तू प्रतिष्ठित हो. हे सिनीवाली! तू भग देवता की सुंदर बुद्धि में रहती हुई संतान उत्पन्न कर. (१५)
O Saraswati! You are as vast as Vishnu. That's why you are distinguished. O Siniwali! You will produce children living in the beautiful intellect of God. (15)