हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 14.2.16

कांड 14 → सूक्त 2 → मंत्र 16 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 14)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
उद्व॑ ऊ॒र्मिःशम्या॑ ह॒न्त्वापो॒ योक्त्रा॑णि मुञ्चत । मादु॑ष्कृतौ॒व्येनसाव॒घ्न्यावशु॑न॒मार॑ताम् ॥ (१६)
हे जलो! अपने कर्म की तरंगों को शांत करो तथा लगामों को ढीला करो. श्रेष्ठ कर्म करने वाले तथा न मारने योग्य वाहन अशुभ न करने लगें. (१६)
O burn! Calm the waves of your karma and loosen the reins. Vehicles that do good deeds and do not kill should not start doing inauspicious. (16)