हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 14.2.33

कांड 14 → सूक्त 2 → मंत्र 33 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 14)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
उत्ति॑ष्ठे॒तोवि॑श्वावसो॒ नम॑सेडामहे त्वा । जा॒मिमि॑च्छ पितृ॒षदं॒ न्यक्तां॒ स ते॑ भा॒गोज॒नुषा॒ तस्य॑ विद्धि ॥ (३३)
हे विश्वावसु! यहां से उठो. हम तुम्हें नमस्कार करते हैं. तू पिता के घर रहने वाली सुशोभित वधू को प्राप्त करने की इच्छा कर. यह तेरा भाग है. जन्म से उस का ज्ञान प्राप्त कर. (३३)
O Vishwavasu! Get up from here. We greet you. Wish to get the graceful bride who lives in the father's house. This is your part. Get knowledge of it from birth. (33)