अथर्ववेद (कांड 14)
अ॑प्स॒रसः॑सधमादं मदन्ति हवि॒र्धान॑मन्त॒रा सूर्यं॑ च । तास्ते॑ ज॒नित्र॑म॒भि ताः परे॑हि॒नम॑स्ते गन्धर्व॒र्तुना॑ कृणोमि ॥ (३४)
हविर्धान और सूर्य के मध्य में अप्सराएं साथसाथ मिल कर आनंदित होने वाले कर्म में हर्षित होती हैं. वह तेरा जन्म स्थान है. तू उन के समीप जा. गंधर्व तथा ऋतुओं के साथ मैं तुझे नमन करता हूं. (३४)
In the middle of the sun and the sun, the nymphs are happy in the action that is enjoyed together. It is your birth place. You go near them. I bow to you with Gandharva and seasons. (34)