अथर्ववेद (कांड 14)
यं मे॑ द॒त्तोब्र॑ह्मभा॒गं व॑धू॒योर्वाधू॑यं॒ वासो॑ व॒ध्वश्च॒ वस्त्र॑म् । यु॒वं ब्र॒ह्मणे॑ऽनु॒मन्य॑मानौ॒ बृह॑स्पते सा॒कमिन्द्र॑श्च द॒त्तम् ॥ (४२)
हे बृहस्पति देव! तुम इंद्र के साथ मिल कर वधू का विवाह के समय पहना जाने वाला वस्त्र इस वधू को प्रदान करो. जो ब्राह्मण का भाग है, तुम दोनों वह वस्त्र मुझे प्रदान करते हो. बुम दोनों ब्राह्मण की अनुमति से यह वस्त्र मुझे देते हो. (४२)
O Jupiter God! You, along with Indra, provide the bride's clothes worn at the time of marriage to this bride. Which is part of the Brahmin, you both give me that garment. You give me this cloth with the permission of both Brahmins. (42)