हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 14.2.52

कांड 14 → सूक्त 2 → मंत्र 52 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 14)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
उ॑श॒तीः क॒न्यला॑इ॒माः पि॑तृलो॒कात्पतिं॑ य॒तीः । अव॑ दी॒क्षाम॑सृक्षत॒ स्वाहा॑ ॥ (५२)
पति की इच्छा करने वाली ये कन्याएं पिता के घर से पति के घर जाती हुई दीक्षा का व्रत धारण करें. यही उत्तम उपदेश है. (५२)
These girls who wish for a husband should take a fast of initiation while going from the father's house to the husband's house. This is the best sermon. (52)