हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 14.2.58

कांड 14 → सूक्त 2 → मंत्र 58 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 14)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
बृह॒स्पति॒नाव॑सृष्टां॒ विश्वे॑ दे॒वा अ॑धारयन् । रसो॒ गोषु॒ प्रवि॑ष्टो॒यस्तेने॒मां सं सृ॑जामसि ॥ (५८)
बृहस्पति के द्वारा निर्मित इस ओषधि को सभी देवों ने पुष्ट किया है. गायों में जो रस प्रविष्ट है, हम उस रस से इस ओषधि को संयुक्त करते हैं. (५८)
This medicine created by Jupiter has been confirmed by all the gods. We combine this medicine with the juice that is entered in the cows. (58)