हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 14.2.60

कांड 14 → सूक्त 2 → मंत्र 60 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 14)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
यदी॒यं दु॑हि॒तातव॑ विके॒श्यरु॑दद्गृ॒हे रोदे॑न कृण्वत्यघम् । अ॒ग्निष्ट्वा॒ तस्मा॒देन॑सःसवि॒ता च॒ प्र मु॑ञ्चताम् ॥ (६०)
तेरी पुत्री अपने केशों को फैला कर रोती रही है, तेरे घर में हुए इस पाप से सविता और अग्नि तुझे छुड़ाएं. (६०)
Your daughter has been crying by spreading her hair, Savita and Agni should save you from this sin in your house. (60)