हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 14.2.61

कांड 14 → सूक्त 2 → मंत्र 61 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 14)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
यज्जा॒मयो॒यद्यु॑व॒तयो॑ गृ॒हे ते॑ स॒मन॑र्तिषू॒ रोदे॑न कृण्व॒तीर॒घम् । अ॒ग्निष्ट्वा॒तस्मा॒देन॑सः सवि॒ता च॒ प्र मु॑ञ्चताम् ॥ (६१)
तेरी बहन तथा अन्य स्त्रियां दुःखी हुई और रोती हुई तेरे घर में घूमती रही हैं. सविता और अग्नि तुझे उस पाप से मुक्त करें. (६१)
Your sister and other women have been roaming around your house crying and crying. May Savita and Agni free you from that sin. (61)