हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 14.2.68

कांड 14 → सूक्त 2 → मंत्र 68 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 14)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
कृ॒त्रिमः॒कण्ट॑कः श॒तद॒न्य ए॒षः । अपा॒स्याः केश्यं॒ मल॒मप॑ शीर्ष॒ण्यं लिखात् ॥ (६८)
यह सैकड़ों दांतों वाला कंघा कृत्रिम रूप से बनाया गया है. यह हमारे शीश पर पहुंच कर हमारे शीश के मैल को छुड़ाए. (६८)
This comb with hundreds of teeth has been artificially created. It reaches our head and releases the scum of our head. (68)