अथर्ववेद (कांड 15)
ऐन॒मापो॑गच्छ॒त्यैनं॑ श्र॒द्धा ग॑च्छ॒त्यैनं॑ व॒र्षं ग॑च्छति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥ (३)
जो इस बात को जानता है, जल उसे प्राप्त होते हैं. उसे श्रद्धा और वर्षा प्राप्त होती है. (३)
He who knows this, he gets water. He receives reverence and rain. (3)